उड़ान... सपनों की ओर

निकल पड़ा है तू सपनों की चाह में
पर दिल की ये आरज़ू सहज नहीं होगी पूरी
घड़ी जो है ये तेरे इम्तिहान की
तो मुश्किलें हज़ारों मिलेगी तेरी राहों में
उमड़ा है जो चुनौतियों का नया सैलाब
डटकर जो तू इनका सामना करेगा
अपनी उम्मीदों को तभी अंजाम दे पाएगा
तेरी ख्वाहिशों की उड़ान भरना अभी बाकी है
कामयाबी तुझे मिलनी ही मिलनी है
तो क्यों घबरा रहा है तू आजमाइशों से
उठना ही है तुझे पहले थोड़ासा गिरकर
किस्मत भी थक जाएगी तेरा जज़्बा देखकर
बुलंद इरादे है जो समाये तेरे भीतर
तू हिम्मत दिखा, सपनों को पंख लगा
आगे बढ़ता जा तू मंजिलों की ओर
अपनी हौसलों की उड़ान ना कर कमजोर
होगा क़दमों में एक दिन सारा जहान
चाहत जो है तेरी छूने की नीला आसमान
छोड़ने है वहां तेरी जीत के निशान
क्योंकि मृगतृष्णा से है भरी तेरे सपनों की उड़ान

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