माफ करना मुझे

माफ करना मुझे
कभी कभी दूर चली जाती हूँ
पर तुझसे दूर जाने के बारे में सोचकर ही
मैं खुद को तन्हा पाती हूँ

माफ करना मुझे
मैं कभी कभी यूँही टूट जाती हूँ
अपने टुकड़े समेटते समेटते मैं खुद ही अपने में सिमट जाती हूँ

माफ करना मुझे
कभी कभी मैं अकेली हो जाती हूँ
साथ होते हैं सभी
पर मैं खुद को अकेला पाती हूँ

माफ करना मुझे
कभी कभी मैं खुद से रूठ जाती हूँ
जानकर भी मेरी गलती नहीं है मैं खुद को दोषी ठहराती हूँ

माफ करना मुझे
बस ऐसी ही हूँ मैं
दूसरों को प्यार करते करते
मैं खुद को प्यार करना भूल जाती हूँ।

Manya Chhabra
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