मैं समय हूं

मैं समय हूं...

मैंने मुगलों के युद्ध भी देखे है...
मैंने शांति के प्रतीक बुद्ध भी देखे है...

मैंने स्वतंत्रा का संग्राम देखा है...
मैंने अयोध्या का राम देखा है.. .

मैंने धरमराज युधिस्टर का धर्म देखा है..
वेद, उपनिषद, गीता का मर्म देखा है...

मैंने पितामह का भीष्म प्रण देखा है..
आज तक गुज़रा हुआ हर एक क्षण देखा है..

लोगो को ना जाने कितनी चाल चलते देखा है..
इंसानों को इंसानों का काल बनते देखा है..

मैंने निरपराधों के तन पे भी घाव देखा है..
इस युग में जिम्मेदारी एवम् मूल्यों का अभाव देखा है..

कलयुग में नेताओं के भ्रष्टाचार देखे हैं..
इसी युग में स्वामी विवेकानंद के विचार देखें हैं..

दुर्गा रूपी नारी का बारम्बार अपमान देखा है..
हर एक कि नज़रों में झूठा अभिमान देखा है..

आज मैं खुद तुम्हें सिर्फ यही बताने आया हूं..
अधर्म के दिए घाव कदापि में भूल नहीं पाया हूं..

जहान में सर्व शक्तिमान सिर्फ मेरी ही गति है..
जो मुझ से सामंजस्य ना रखे, उसका जीवन मात्र क्षति है..

होने को मैं कुछ नहीं, और मैं ही अनंत इतिहास हूं..
मैं ही मरण, और मैं ही जीव की हर एक श्वास हूं..

मैं ही भूत, मैं ही भविष्य और मैं ही वर्तमान हूं..
मैं ही तुम्हारा चूर चूर होने वाला अभिमान हूं..

मैं अनश्वर हूं, पर मैं ही तुम्हारा काल हूं..
अगर अभि भी ना सुधरे तो मैं ही आगे स्तिथि विकराल हूं..

मैं समय फ़िर दोहराता हूं...
सावधान
सावधान
सावधान

मैं ही इस जगत की अमिट धुरी हूं..
जीवन और मरण मात्र में, मैं ही एक दूरी हूं.

Nirmal Chand Malooka
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