वो भी दिन थे

वो भी दिन थे
जब तुम खुलेआम सड़को पर घूम रहे थे
तब कुछ मुल्क आज़ादी से घूमने की दुआ मांग रहे थे,
तुम्हें स्वच्छ हवा चाहिए थी
हमें खुला आसमान चाहिए था,
तुम जहाँ पिज्जा-बर्गर में डूब रहे थे
हम दो वक़्त की रोटी को तरस रहे थे,
वो भी दिन थे
जब हम सब अलग थे
जब हम सब अपने शानो-शौक़त में लीन थे,
वो भी दिन थे
जब हम पूरी जिंदगी कर्फ्यू में बीता देते थे
और आज तुम कुछ दिन के लॉक-डाउन, कर्फ्यू की स्थिति से घबरा रहे हो,
हम तो साहब पैदा ही एेसे माहौल में होते हैं
हम कोई और नहीं आपके ही काश्मीर के दोस्त है,
आज हालात एक है
बस चाहिए तो सिर्फ सबका साथ व प्यार,
मंजिल मुश्किल जरूर है
पर असंभव नहीं,
वहीं दिन चाहिए तो थोड़ा संयम से रहे
वो दिन भी आ जाएंगे|

Simmi Bubna
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