माँ हें वंदन, माँ हें प्यार

कलियुग के इस दौर में सबको मैं दिखलाना चाहता हूँ
माँ हें वंदन, माँ हें प्यार सबको बतलाना चाहता हूँ!!
सात समंदर पार भी जब हो जाता हैं तुझको कुछ भी
पल-भर मैं तेरी पीड़ा आ जाती हैं उसके मन मैं!!
जवानी जब आ जाती हैं, तुझको भी प्यार हो जाता हैं
तुझको भी अपना ये प्यार लैला-मजनू सा लगता हैं!!
तु ना जाने, तु ना समझें, एक बात कर दूं मैं तुझसे
तुझको लगता हैं, दिल मिलना ही तो प्यार होता हैं
तुझको लगता हैं, जिस्म का मिलना ही तो प्यार होता है!!
तुझको अभी समझ नहीं प्यार का होना क्या होता हैं
तेरा भी ये दोष नही तू, कलियुग का रोना रोता हैं!!
"मैं पूछना चाहता हूं कलियुग कें इन बेचारों सें,
मिलन जब होता हैं परमात्मा का इस आत्मा से
तो क्या किसी दिल की जरूरत पड़ती हैं तुझको इसमें,
तो क्या किसी जिस्म की जरूरत पड़ती हैं तुझको इसमें"
ऐसा ही तो प्यार तेरी माँ तुझसे भी तो करती हैं
कलियुग के इस दौर मैं सबको मैं दिखलाना चाहता हूँ
माँ हें वंदन, माँ हें प्यार, सबको बतलाना चाहता हूँ!!

Manoj bohra
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